The RSS becomes an all Bharat movement. Develops its unique organisation method.
Date: 22-Oct-2012

1939

श्री गुरुजी को संघ का सरकार्यवाह घोषित किया।
हिंदी और मराठी प्रार्थना के स्थान पर संस्कृत प्रार्थना स्वीकृत।
संस्कृत में संपूर्ण आज्ञाएँ देना प्रारम्भ।

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Shri Guruji was designated as General Secretary -Sarkaryavaha - of Sangh.

 

1938

प्रथम और द्वितीय वर्ष की शिक्षा लाहौर में प्रारंभ।
सरकारी नौकरों को संघ में भाग लेने के लिए मुंबई प्रांतिक सरकार ने प्रतिबंधित किया।
डॉ. हेडगेवार पुणे की हिंदु युवक परिषद के अध्यक्ष।
दिसम्बर में नागपुर के शीत शिबिर को स्वातंत्र्यवीर सावरकर की भेंट।
भाग्यनगर मुक्ती संग्राम (हैदराबाद), में स्वयंसेवकों का सहभाग।

Bombay Presidency prohibited government employees from participating in RSS activities.

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Dr. Hedgewar presided over the Hindu Yuvak Parishad at Pune.
Savarkar visits Dec. 1938 Nagpur Camp.
Swyamsevaks Participated in 'Bhaganagar Mukti Sangram' satyagraha, [Hydrabad freedom movement] a movement against the Nizam rule and its Hindu repressive policies.

 

1937

उत्तर प्रदेश में सघ कार्य प्रारंभ। 10 स्वयंसेवक इस हेतु नागपुर से उत्तर प्रदेश गए।
डॉक्टरजी का पुणे में मंदिर सत्याग्रह में सहभाग। वीर सावरकर जी की रत्नागिरी की स्थानबध्दता से पूर्ण मुक्तता। नागपुर शाखा द्वारा 12 दिसम्बर को उनका भव्य स्वागत।
स्वामी अखंडानंद से श्री गुरुजी ने सारगाछी दीक्षा में ग्रहण की। स्वामी अखंडानंद के देहावसान के बाद नागपुर वापस।

Sangh work started in Uttar Pradesh. Batch of 10 Swayamseveks was sent for the purpose.
Doctorji participated in Pune Mandir Ghanti Satyagraha.
Veer Savarkar released from Ratnagiri detention. He was given a rousing welcome by Nagpur Shakha on 12 Dec.

 

1936

महाराष्ट्र में संघ कार्य का विस्तार।
वर्धा में विजयादशमी 25 अक्तूबर को राष्ट्र सेविका समिती की स्थापना।
पंजाब में संघ कार्य का प्रारंभ।

Sangh work started in other parts of Maharashtra.
Rashtra Sevika Samiti was founded on Vijayadahmi,25 Oct.
Sangh work started in Punjab.

 

1935

प्रथम और द्वितीय वर्ष का अधिकारी शिक्षण वर्ग पुणे में प्रारंभ। नागपुर के बाहर का प्रथम ऐसा वर्ग।
महाकौशल क्षेत्र में संघ विस्तार के लिए डॉक्टरजी ने स्वयंसेवकों को भेजा।

Doctorji deputed swayamsevks to spread the message of Sangh in Mahakosal - CentralProvince.

 

 

सरकारी नौकरों को संघ में भाग लेने के लिए प्रतिबंधित करने वाला अध्यादेश, मध्य प्रांत असेंब्ली ने बहुमत से निरस्त किया।
वर्धा के संघ शिबिर को गांधी जी की भेंट।
डॉक्टरजी तथा अप्पाजी जोशी की गांधी जी से भेंट तथा संघ के बारें में चर्चा।
नागपुर के रेशिम बाग संघ स्थान को डॉक्टरजी ने खरीदा।
श्री गुरुजी नागपुर शाखा के कार्यवाह घोषित हुए।

The order prohibiting Government employees from participating in RSS was defeated in the legislative assembly.
Gandhiji Visited the winter camp - Hemant Shibir - in Vardha. He offered his salute to Bhagavadhwaj.
Doctorji with Appaji Joshi met Gandhiji and explained him about Sangh and its objectives.
Doctorji purchsed Reshembhag ground in Nagpur which became the Head Quarters for Sangh activities.
Shri Guruji was designated as secretary - Karyavaha - of Nagpur Shakha.

 

1932

15 दिसम्बर मध्य प्रान्त सरकार ने सरकारी नौकरों को संघ में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया।

Central Province Government issued orders on December 15 prohibiting government employees from participating in RSS.

 

1931

फरबरी 14 डॉक्टरजी जेल से मुक्त।
डॉक्टरजी ने बनारस में शाखा प्रारंभ की।
श्री. भैय्याजी दाणी के प्रयास से श्री गुरुजी का बनारस संघ शाखा में आना प्रारंभ हुआ।
बालाजी हुद्दार, उस समय के सरकार्यवाह, तथा उनके सहयोगियों को बालाघाट केस में गिरफ्तार । सरकारी खजाना लूटने के प्रयास का आरोप।

Doctorji was freed from Jail on February 14.
Doctorji Started Shakha in Benares.

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Guruji at benares
Sri Bhayyaji Dhani introduced Madhav Sadasiva Golwalkar - Shri Guruji - to shakha in Benares.

 

1930

काँग्रेस ने संपूर्ण स्वातंत्र्य का प्रस्ताव पारित किया। डॉक्टरजी ने सभी संघ शाखाओं को 26 जनवरी को पूर्ण स्वातंत्र्य दिन मनाने के लिए कहा।
डॉक्टरजी ने तथा कई स्वयंसेवकों ने जंगल सत्याग्रह में भाग लिया। डॉक्टरजी को 9 माह का कारावास। सत्याग्रह में जाने से पहले डॉक्टरजी ने सरसंघचालक का दायित्व डॉ. ल. वा. परांजपे को सौंपा।
गणवेश में खाकी टोपी की जगह काली टोपी आ गयी।

Congress passed a resolution proclaiming Complete Independece - Purna Swaraj. Doctorjiinstructed all shakhas to celebrate 26 January 1930 as Independence Day.
Doctorji with several swayamsevaks participated in Jungle Satyagraha and was jailed.Dr.L.V.Paranjape was designated as Sarsangh Chalak.
Black cap was introuduced as a part of uniform in place of Khaki cap.