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मा. सरकार्यवाह का प्रतिवेदन 2013

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प. पू. सरसंघचालक जी, आदरणीय अखिल भारतीय पदाधिकारी गण, आदरणीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सन्माननीय सदस्य, क्षेत्रों एवम् प्रान्तों के मान्यवर संघचालक तथा कार्यवाह बंधुगण, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के सदस्य गण तथा सामाजिक जीवन के विविध कार्यों में कार्यरत समस्त निमंत्रित भगिनी वर्ग एवम् बंधुओं, युगाब्द 5114 तथा मार्च 2013 में जयपुर जैसी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान पर संपन्न हो रही इस प्रतिनिधि सभा में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

श्रद्धांजलि -
राष्ट्रीय सामाजिक जीवन में अपना जीवन समर्पित करते हुए हम से हमेशा के लिए विदा हो गये ऐसे महानुभावों का स्मरण होना स्वाभाविक है। रा. स्व. संघ ने जो भी दायित्व सौपा उसे सम्पूर्ण मनोयोग से परिश्रमपूर्वक सफलता की ओर ले जानेवाले मा. श्रीकांतजी जोशी अपने अंतिम श्वास तक कार्य करते हुए स्वस्थ शरीर के साथ हमें छोड़कर चल गये। अपने चिंतन परिश्रम से आदर्श ग्राम का उदाहरण प्रस्तुत कर सदैव प्रसन्नता बिखेरनेवाले ‘कर्मयोगी’ श्री सुरेन्द्रसिंह चैहान अल्पकाल की अस्वस्थता से स्वर्ग की यात्रा पर निकल गये। गहन चिंतन के धनी रहे एवम् जीवन के अंत तक अपना योगदान देते रहे ऐसे पुणे के श्री बापूसाहेब केंदुरकर, गृहस्थ जीवन के समग्र दायित्व का निर्वाहन करते हुये सन्यस्त जीवन के समान कार्यरत रहकर विभिन्न दायित्व वहन करनेवाले श्री नाना जोशी आज हमारे मध्य मे नहीं रहे।
 विदर्भ के पुराने पीढ़ी के प्रचारक, प्रतिकूलताओं पर मात करते हुये, अत्यंत शांत, मधुर स्वभाव के श्री भैयाजी गाड़े, अक्षर सुधार का संकल्प लेकर देशभर भ्रमण करते हुये हजारों बन्धुओं को प्रेरणा प्रदान करनेवाले, सादगी विनम्रता का आदर्श प्रस्तुत करते हुए अकस्मात् स्वर्ग लोक को प्रस्थान कर गये ऐसे श्री नाना लाभे, शारीरिक वेदनाओं को प्रसन्नता से स्वीकार करते हुये अत्यंत मृदुभाषी ऐसे जेष्ठ प्रचारक नागपुर के श्री शरदराव चौथाईवाले ऐसे सभी जेष्ठ बन्धुओं की अनुपस्थिति सदा ही खलती रहेगी।
 विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना से ही जुड़े हुये, केशधारी बन्धुओं के मध्य सम्मान प्राप्त, सद्गुरु जगजीत सिंघजी नामधारी, कर्नाटक के धार्मिक, सामाजिक जीवन में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त, आदिचुंचनगिरी मठ के पूज्यपाद बालगंगाधरनाथ स्वामीजी अपने अनुयाईयों को पीछे छोड़कर स्वर्गागमन कर गए।
बिहार सरकार में वित्तमंत्री रहे, गुजरात व राजस्थान के महामहिम राज्यपाल रहे ऐसे पूर्व जेष्ठ प्रचारक श्री कैलाशपति जी मिश्र, दक्षिण बिहार में भारत विकास परिषद के कार्यविस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका जिनकी रही और विकलांग पुनर्वसन के कार्य को गति प्रदान करने वाले श्री देवकीनंदन माथुर जी, सक्षम के विदर्भ प्रांत कोषाध्यक्ष श्री सुधीर जी दवंडे साधना करते हुए अपनी अंतिम यात्रा पर चले गये।
लोथल तथा द्वारका से संबंधित शोध कार्य में महत्वपूर्ण योगदान देनेवाले और अपने अध्ययन से पुरातत्व विभाग को गरिमा प्रदान करनेवाले कर्नाटक के प्रो. एस. आर. राव, राजनैतिक क्षेत्र में अर्धशतक से भी अधिक वर्षों तक अपनी प्रखर लेखन, वक्तृत्व से जनसामान्य को प्रभावित करके राजनीति की विशिष्ट दिशा प्रदान करनेवाले श्री बाळासाहेब ठाकरे, भारतरत्न से सम्मानित ख्यातनाम सितारवादक पं. रवीशंकर जी, महात्मा गांधीजी के विचारों को पूर्ण मनोयोग से स्वीकार कर समाज की सेवा में अपना जीवन समर्पण करनेवाले वर्धा के श्री ठाकुरदास जी बंग, पूर्व प्रधानमंत्री श्री इंद्रकुमार गुजराल, भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा योजना आयोग के उपाध्यक्ष, श्री के. सी. पंत, अरुणाचल प्रदेश के पूर्व चीफ सेक्रेटरी तथा विघाभारती अरुणाचल के भूतपूर्व अध्यक्ष श्री जेकॉम रीबा काल के प्रवाह में आज हमारी आखों के समक्ष नहीं रहे।
 विश्व प्रसिध्द औषधि निर्माता एवम् कॅडीला मेडिकल फार्मा के संस्थापक, श्री इंद्रवदन मोदी, 87 वर्ष की आयु में चल बसे।
 वैश्विक स्तर पर जिनकी शिल्पकला सम्मान प्राप्त रही, अपने देश की कई महान विभूतियों के शिल्प निर्माण के लिए जानी जाती है ऐसी गुजरात की श्रीमती जशुबहन शिल्पी आज हमारे मध्य नहीं रही।
 असम के गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु रहे, साम्यवादी विचारक, कई आंदोलनों का नेतृत्व करनेवाले श्री देवप्रसाद बरुआ, असम में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और असम क्षेत्र का सबसे बड़ा धार्मिक संगठन श्रीमान शंकर देव संघ से जुड़े हुये ऐसे श्री सीतारामजी सूतिया अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर गए।
 प्रयाग में संपन्न पावन कुंभ के अवसर पर अव्यवस्था के चलते जो दुर्घटना घटी उसमे मृत्यु के ग्रास बने, विभिन्न आतंकवादी घटनाओं के शिकार बने, कश्मीर सीमापर पाकिस्तान की अमानवीयता के व्यवहार से अपना दायित्व निर्वहन करते हुए शहीद होनेवाले सीमा सुरक्षा बलके दो बहादुर जवान सदा ही हमारी स्मृति में रहेंगे। दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर महिलाओं का उत्पीड़न और पश्चात् हुई हत्याओं की घटनाएँ अत्यंत व्यथित करनेवाली रही है।
 ऐसे सभी ज्ञात-अज्ञात बन्धुओं के निधनपर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा समस्त परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करती है तथा दिवंगत महानुभावों को हम श्रध्दाजंलि अर्पित करते हैं।
कार्यस्थिति -
 हम सबको ज्ञात है कि अपनी नित्य की रचना में प्रशिक्षण की दृष्टि से संघ शिक्षा वर्ग का अपना महत्व है। गत वर्ष 2012-13 में देशभर में  50 स्थानों पर 52 संघ शिक्षा वर्ग संपन्न हुए। प्रथम वर्ष में 7408 स्थानों से 12549 शिक्षार्थी, द्वितीय वर्ष में 2320 स्थानों से 3063 शिक्षार्थी तथा तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण हेतु 923 स्थानों से 1003 शिक्षार्थी सहभागी हुए। 2012-13 में सामान्य वर्गों के समान ही प्रथम वर्ष तथा द्वितीय वर्ष के विशेष वर्ग भी संपन्न हुए। प्रथम वर्ष में 895 स्थानों से 1218 शिक्षार्थी तथा द्वितीय वर्ष में 621 स्थानों से 768 शिक्षार्थी सहभागी हुए।
 उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान में देश में 28788 स्थानों पर 42981 शाखाएँ चल रही है। 9557 स्थानों पर साप्ताहिक मिलन तथा 7178 स्थानों पर संघ मंडली के रूप में कार्य चल रहा है।
 इस वर्ष सभी प्रांतो में शाखाविस्तार की अच्छी योजना बनी है। परिणामतः स्थान तथा शाखादोनों में अपेक्षाकृत वृद्धि हुई है। यह गति बनी रहे और शाखामें स्थायीत्व और गुणात्मकता में अधिक वृद्धि हो इस बात की ओर सभी को अधिक ध्यान देना होगा।
कार्य विभाग वृत्त ः-
(1) शारीरिक विभाग ः- इस वर्ष शारीरिक विभाग ने सभी शाखाओं के लिये प्रहार यज्ञ कार्यक्रम दिया था। जिसका वृत्त पर्याप्त समाधानकारक हैंै।
प्रहार यज्ञ ः- 15924 शाखाओं में प्रहार यज्ञ का आयोजन हुआ जिसमें 1,66,959 स्वयंसेवकों ने भाग लेकर कुल 5,71,76,520 प्रहार लगाए। 1000 एवम् उससे अधिक प्रहार लगानेवाले स्वयंसेवकों की संख्या 18421 है।
(2) बौध्दिक विभाग ः- प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी चयनित 78 तरुण कार्यकर्ताओं का विशेष प्रशिक्षण वर्ग भोपाल में संपन्न हुआ। 40 कार्यकर्ताओं द्वारा विषय प्रस्तुति हुई। बौध्दिक क्षमता का परिचय हुआ।
(3) प्रचार विभाग ः- 2012-13 में 25 प्रान्तों में पत्र लेखन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें 2248 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। परिणामतः समाचारपत्रों में प्रतिक्रिया देने का प्रमाण बढ़ा हैं।
दूरदर्शन पर होनेवाली चर्चाओं में सहभागी हो सकें इस दृष्टि से प्रान्तों में कार्यशालाओं का आयोजन हुआ। परिणामतः विभिन्न भाषाओं के 50 चॅनलों में लगभग 100 बन्धु-भगिनी चर्चा में सहभागी हो रहे हैं।
प्रचार विभाग के सहयोग से विश्व संवाद केन्द्रों द्वारा आयोजित नारद जयंती पर 72 स्थानों पर 182 पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इन कार्यक्रमों में गणमान्य नागरिक, पत्रकार अच्छी संख्या में उपस्थित रहें।
देशभर में 31 जागरण पत्रिकाओं द्वारा देशके 1.7 लाख ग्रामों तक विभिन्न जानकारी एवम् राष्ट्रीय विचार पहुँचाने का कार्य हो रहा हैं।
‘सोशल मीडिया’ में योजनाबध्द प्रयास के चलते संघ की ‘वेब साइट’ पर संघ से जुड़ने वालों की संख्या में लक्षणीय वृद्धी हुई है। प्रतिमास लगभग 1500 बन्धु संघ से जुड़ने की इच्छा व्यक्त करते हैं।
प्रान्तों में सपन्न विशेष कार्यक्रम ः-
1) दक्षिण बंग ः- स्वामी विवेकांनद के सार्धशती को निमित्त बनाकर द. बंग प्रान्त में जनवरी 2013 में स्वामी विवेकानंद युवा शिविर का आयोजन किया गया। 15 से 40 आयु के स्वयंसेवकों को ही प्रवेश था। कल्याणी में आयोजित इस शिविर में 2052  स्थानों से 9115 युवाओं ने भाग लिया। द. बंग के अपने कार्य की दृष्टि से यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। शिविर के कार्यक्रम में रामकृष्ण मठ के सन्यासियों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनिय है। समापन कार्यक्रम मे आसपास के ग्रामों से और कोलकाता महानगर से 25000 की उपस्थिति अपने आप में विशेष है।
2) पूर्व आंध्र ः- गत 1 वर्ष से निरंतर प्रयासरत रहते हुये तटवर्ती पूर्व आंध्र के संघकार्य को बल प्रदान करनेवाला ‘हिन्दू चैतन्य शिबिरम्’ निश्चित ही मील का पत्थर सिध्द होगा। शिविर में आयोजित भारतीय प्रज्ञा प्रदर्शनी दर्शकों में आत्मगौरव का भाव बढ़ानेवाली रही। 2404 स्थानों से 17233 स्वयंसेवक शिबिर मे सम्मिलित हुए। शिबिर स्थल पर ही आयोजित मातृ-संम्मेलन में 10,000 से अधिक माताएँ, प्रबुध्द संम्मेलन में समाज के 960 गणमान्य-जन तथा संत सम्मेलन मे विविध आश्रमों से 72 संतों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय है। समापन समारोह मे 60,000 नागरिकों की उपस्थिति कल्पनातीत रही। लगभग 1.25 लाख बन्धुओं ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
3) पश्चिम आंध्र ः- पश्चिम आंध्र प्रान्त में ‘‘घोष तरंग’’ नाम से घोष शिबिर का आयोजन किया जिसमें 865 वादकोनें भाग लिया। समापन कार्यक्रम में घोष प्रदर्शन प्रभावी रहा। लगभग 8000 नागरिकों की सहभागिता रही। इस आयोजन हेतु गठित ‘‘स्वागत समिति’’ में आंध्र प्रांत के विशेषतः कलाक्षेत्र के गणमान्य व्यक्तिओं का सहभाग रहा।
4) मालवा प्रान्त का एकत्रीकरण ः- मालवा प्रान्त (मध्यप्रदेश के अंतर्गत) में संघकार्य निरंतर बढ़ रहा है। प्रान्त मे अल्प समय का विशाल एकत्रीकरण करने का निश्चय किया, सभी कार्यकर्ताओं के परिश्रम से इंदौर में संपन्न यह एकत्रीकरण अद्भुत रहा। जिसमें 3991 स्थानों से 83345 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहे। विशेषतः 108 नगरों की सभी 713 बस्तियों का प्रतिनिधित्व रहा। आयोजन विशाल था परंतु इन्दौर महानगर के सामान्य यातायात में किसी प्रकार की बाधा न आए यह विचार कर योजना बनायी थी। प्रशासन, प्रसार माध्यम, जन सामान्य ने इस योजना की सराहना की।
5) कर्नाटक दक्षिण ः- कर्नाटक दक्षिण के मंगलूर विभाग में सघन संघकार्य है। वैसे कहा जाए तो मंगलुर एक प्रशासकीय जिला ही माना जाता है। अभी-अभी प्रशासन ने उडुपी को एक नया जिला बनाया है। वर्तमान में इस विभाग के सभी ग्रामों में शाखा अथवा सम्पर्क है। मंगलूर विभाग ने भी विशाल एकत्रीकरण का आयोजन फरवरी मास में किया। 1500 ग्रामों में से 1080 ग्रामों से और 3015 बस्ती में से 2786 बस्ती से 85347 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहें।
 इस विशाल एकत्रीकरण के पूर्वतैयारी के नाते 274 अल्पकालिन विस्तारक, 457 कार्यकर्ता घरपर रहकर परंतु पूर्ण समय और 15000 से अधिक गटनायकों के परिश्रम से यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
 मालवा और मंगलूर के विशाल एकत्रीकरण की एक और विशेषता यह रही कि किसी प्रकार के मुद्रित साहित्य के बिना केवल मौखिक सूचनाओं के आधारपर ही कार्यक्रम सम्पन्न हुए। संगठनात्मक रचना का सामर्थ्य ही इस कार्यक्रमों से प्रकट हुआ हैं। दोनों कार्यक्रमों तथा कोलकाता और पूर्व आंध्र के शिविरों में पू. सरसंघचालक जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
6) महाविद्यालयीन छात्र शिविर कोकण प्रान्त ः- सार्धशती समारोह निमित्त से कोकण प्रान्त ने महाविद्यालयीन छात्रों का 3 दिन का शिविर का आयोजन किया था। 1467 छात्र शिविर में सम्मिलित हुए। जिसमें 546 छात्र 11,12 वीं के, 323 कॉलेज के, 535 व्यावसायिक पाठ्यक्रम (मेडिकल, इंजीनिअरींग, एल.एल.बी.) के और 63 स्नातकोत्तर पढ़ाई करनेवाले थे।
7) कार्यकर्ता शिविर, जयपुर ः- प. पू. सरसंघचालकजी के प्रवास क्रम में सितम्बर-2012 में जयपुर प्रान्त में दायित्ववान एवम् प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के शिविर का आयोजन किया। शिविर में शाखाटोली सहित ऊपर के दायित्ववान एवम् संघ शिक्षा वर्ग शिक्षित स्वयंसेवकों को ही प्रवेश तय किया था। शिविर में सामूहिक शारीरिक प्रदर्शन एवम् सांघिक गीत प्रस्तुत किया गया। विविध दायित्वानुसार श्रेणियाँ बनाकर चर्चा, बैठकों का आयोजन किया गया। शिविर में 1946 स्थानों से 6968 स्वयंसेवक सहभागी हुए।
8) उत्तर तमिलनाडु ः- रथसप्तमी पर शाखाओं में सूर्यनमस्कार का विशेष आयोजन किया था जिसमें 675 शाखाओं के 10721 स्वयंसेवकों ने भाग लिया और कुल 2,22,932 सूर्यनमस्कार किये।
 उपरोक्त सभी कार्यक्रमों से अपने संगठन सामर्थ्य का दर्शन होता है। विश्वास है कि स्थान-स्थान पर अनुवर्तन के सदर्भ में भी अवश्य विचार किया होगा। भविष्य में कार्यवृध्दि का संकेत इस कार्यक्रमों से प्राप्त होता हैं। इन सभी कार्यक्रमों में नागरिकों का एवम् प्रसार माध्यमों का सकारात्मक सहभाग रहा।
राष्ट्रीय परिदृश्य ः-
वर्ष 2012-13 में देश में कई घटनाएँ घटी हैं। कुछ जानकारी प्रेरक है तो कुछ विषयों पर समाज में सभी स्तरों पर जागरण एवम् चिंतन आवश्यक है।
(1) पाक सेना द्वारा नियंत्रण रेखा का उल्लंघन एक षड़यंत्र ः-
जनवरी मास में पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसकर भारतीय सैनिकों पर बर्बर हमले यह साधारण घटना नहीं, तो पाक प्रायोजित आंतकवादी समूह द्वारा रचा गया एक षड़यंत्र है, ऐसा सामने आया है। भारतीय गुप्तचर ब्यूरो का भी यही मानना है। शहीद हेमराज का सिर काटकर शव भारत की सीमा में छोड़कर जाना यह पाकिस्तान की बर्बरता ही प्रकट करता है। पाक समर्पित जिहादी तत्व सीमा क्षेत्र में भारत विरोधी अभियान को अंजाम देते रहते हैं। सीमा पर भारत विरोधी ताकतों की उपस्थिति अपने देश के सम्मुख चुनौती है। आवश्यकता है कि भारत सरकार इन घटनाओं को गंभीरता से ले। सशस्त्र एवम् सामथ्र्य संपन्न सैन्य-बल की उपस्थिति ही जनसामान्य का मनोबल सशक्त बने रहने में सहायक सिध्द होगी। भारत सरकार समयोचित रणनीति बनाए और देशवासियों को अपने देश की सीमाओं की सुरक्षा के संबंध में आश्वस्त करे।
(2) घुसपैठ एक व्यापक षड़यंत्र ः-
विभाजन के पश्चात् लगातार बांगलादेश से भारत में हो रहे अवैध प्रवेश की समस्या आज गंभीर रुप ले रही है। रोजगार पाने के नाम पर भारत की सीमा में घुसकर प्रवेश करने वाले बांगलादेशी नागरिक आज देश के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ते हुए अवैध रुप से नागरिकता के अधिकार प्राप्त कर सत्ता केंद्रों को प्रभावित कर रहे हैं। केवल जनसंख्या का असंतुलन ही नहीं अपितु यहांपर रहनेवाले हिन्दू-समाज के सामने एक चुनौती खड़ी कर रहे हैं। विशेषतः उत्तर पूर्व क्षेत्र में घटनेवाली घटनाएँ यह सोचने के लिए मजबूर करती हैं कि उस सारे क्षेत्र को भारत से अलग करने का यह सुनियोजित षड़यंत्र हैं। दुर्भाग्य यह है कि अपने देश में उन्हें सहायता करनेवाले तत्व विद्यमान हैं।
विगत गत अगस्त में कोकराझार में हुई व्यापक हिंसाचार की घटना केवल मात्र स्थानीय विवाद मानना भूल होगा। इस घटना को व्यापक षड़यंत्र के हिस्से के रूप में देखना होगा। असम में हिंसा का दौर तो कई वर्षोंसे चल रहा हैं, परंतु इस बार घुसपैठियों को कड़े प्रतिकार को झेलना पड़ा और कुछ क्षेत्र खाली करना पड़ा। परिणाम स्वरुप समर्थकों के सहयोग से शक्ति प्रदर्शन करना प्रारंभ किया और वह केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा तो मुंबई में ‘रजा अकादमी’ के तत्वावधान में हिंसक प्रदर्शन कर देशवासियों को खुला आव्हान दिया। देश के विभिन्न स्थानोंपर शिक्षा एवम् रोजगार हेतु पूर्वोत्तर से गये हुये लोगों को धमकाकर वापस अपने क्षेत्र मे जाने के लिये मजबूर करने का प्रयास किया गया। पुणे, बंगलूर, चेन्नई, हैदराबाद, दिल्ली आदि नगरों में संघ के स्वयंसेवक तथा संघ प्रेरित संगठनों ने उत्तर पूर्व राज्यों के युवकों की सुरक्षा एवं सभी प्रकार की सहायता के लिये व्यवस्था की। दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी, अल्पसंख्यकों को ही सुरक्षा का बहाना देकर इस प्रकार की गंभीर चुनौतियों को अनदेखी कर रहे हैं। न तो आज तक सीमाओं को ठीक से बंद किया गया और न ही विदेशी नागरिकों को पहचान कर वापस भेजने की कारवाही की गयी।
(3) सत्तालोलुप राजनीति ः- 
करोड़ों हिन्दुओं के साथ सभी देशवासीयों को तथाकथित अल्पसंख्यक यहीं के राष्ट्रीय प्रवाह के अंग बनें इस दृष्टि से प्रयास होने के बजाय अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण करनेकी नीति अपनाने कीं होड़ लगी हैं। भारत सरकार के गृहमंत्री जैसे जिम्मेदार व्यक्ति मुस्लिम मतों पर ध्यान रखकर ‘हिन्दू, भगवा, संघ, भाजपा’ यह सब आतंकवाद के प्रतीक हैं ऐसे असत्य एवम् कुत्सित बयान देकर अपनी हिन्दू विरोधी मानसिकता किये हैं। हिन्दू आतंकवाद की चर्चा करनेवालों में वह साहस नहीं दिखाई देता कि खुले रूप से आंतकवादी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति एवम् संगठनों पर कठोर कारवाई करें। विधानसभा के सदस्य बने कट्टरपंथी एवं सांप्रदायिक विचार के जनप्रतिनिधि हिन्दू विरोधी हिंसा के लिए आव्हान करने का साहस कर सकता हैं और प्रशासन कारवाई करने में हिचकिचाता हैं यह तुष्टिकरण नीतिका ही परिणाम हैं।
गत दिनों में बंगाल के 24 परगणा जिले में हिन्दू मन्दिरों एवम् बस्तियों पर हुए हमले, भाग्यनगर (हैदराबाद) में हुए बम विस्फोट जैसी घटनाएँ इस्लामिक आक्रमकता का ही परिचायक है। यह सोचने का विषय है कि अफजल गुरु जैसे आतंकवादी को फांसी देने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और कुछ अन्य नेताओं की प्रतिक्रयाएँ भी किस मानसिकता को प्रकट करती है।
(4) संदेहपूर्ण रक्षा सौदा ः-
प्रतिरक्षा सौदे में व्याप्त भ्रष्टाचार की घटना अत्यंत निंदनीय है। सेना के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़कर क्या रक्षा मंत्रालय अपने दायित्व से मुक्त रह सकता हैं? सेना के उच्चपदस्थ अधिकारी तथा रक्षा मंत्रालय संदेह के घेरे में आना देश की सुरक्षा की दृष्टि से अहितकारी सिध्द होगा।
 ऐसी विघटनकारी राजनीति एवम् भ्रष्टाचारग्रस्त व्यवस्था देश के लिए अत्यंत घातक हैं।
(5) महिला उत्पीड़न की घटनाएँ ः-
वर्तमान समय में महिला उत्पीड़न एवं यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं से समाजमन आहत में हैं। जीवन-दृष्टि एवम् नैतिक मूल्यों में आया क्षरण का ही यह परिणाम हैं।
 परिणामतः आयी हुई विकृतियों से केवल सुरक्षा तंत्र पर जिम्मेदारी ड़ालकर, कानून व्यवस्था में सुधार कर समस्या का पूर्ण हल निकला नहीं जा सकता है।
 प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक संस्थाओं को भी अपनी भूमिका पर मंथन करना होगा। नैतिकता पूर्ण आचरणयुक्त जीवनशैली ही में इस समस्या का हल है।
(6) FINS द्वारा आयोजित ‘सरहद् को प्रणाम’ ः-
 1962 के चीनी आक्रमण को 50 वर्ष पूर्ण हुये, यह एक ऐसा युध्द था जिसमें भारतीय सेना को हार खानी पड़ी थीं। इस घटना को निमित्त बनाकर Forum for integrated national security ने एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की योजना बनायी। देशका युवक एक बार अपनी सीमाओं को देखे, सीमा क्षेत्र की समस्या समझे, सीमावर्ती ग्रामवासियों को मिलकर संवाद करे, सुरक्षा हेतु प्राणों की बाजी लगाने वाले हमारे सैनिकों से मिले और देश की रक्षा का संकल्प लेकर लौटे, यह सोचकर ‘सरहद् को प्रणाम’ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। FINS के अनुरोध पर संघ के स्वयंसेवकों ने इस विशाल कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूर्ण रूप से सहयोग किया।
 इस कार्यक्रम हेतु 18 से 35 आयुसीमा तय की थी। सभी जिलों का प्रतिनिधित्व हो ऐसा प्रयास रहा। लगभग सभी जिलों से 5679 युवक इस कार्यक्रम में शामिल हुये। देश के 15 राज्यों से अंतरर्राष्ट्रीय सीमा जुड़ी हुई हैं, सभी राज्यों में सीमापर युवक पहुँचे। अपने स्थान से पवित्र जल लेकर गये और सीमा क्षेत्र की पवित्र माटी साथ लेकर आये। स्थानीय ग्रामवासीयों के साथ मिलकर ‘सीमा सुरक्षा श्रृखंला’ बनाईं गई जिसमें 1,08,105 बन्धु-बहनें सहभागी हुए। इस सारे आयोजन को सफल करने में लगभग 7700 प्रबंधकेां का सहभाग रहा। युवा वर्ग को अपने देश की सुरक्षा के प्रति जागरण करने की दृष्टि से आयोजन अत्यंत प्रेरक रहा।
(7) स्वामी विवेकानंद सार्धशती समारोह ः-
स्मारोह समिति के तत्वावधान में दि. 25 दिसम्बर 2012 के संकल्प दिवस से अनौपचारिक रुप से समारोह का प्रारंभ हुआ हैं। अभीतक जो कार्यक्रम हुये उसमें समाज की सहभागिता अत्यंत प्रभावी, प्रेरक रही है। समारोह समिति द्वारा कार्यकर्ताओं हेतु आयोजित 25 दिसम्बर 2012 का संकल्प दिवस 9370 स्थानों पर संपन्न हुआ। इसमें 4,46,969 पुरुष एवम् 90715 महिलाएँ सम्मिलित हुईं। स्वामीजी के जन्मदिवस दि. 12 जनवरी 2013 को आयोजित शोभायात्राओं में स्थान-स्थान पर नागरिकों की सहभागिता अभूतपूर्व रही। हिन्दू समाज के साथ ही कुछ स्थानों पर अहिन्दू बन्धुओं की सहभागिता सामाजिक सद्भाव को ही अधोरेखित करती हैं। देशभर में 13273 शोभायात्राओं का आयोजन हुआ जिसमें 48 लाख से अधिक नागरिक सम्मिलित हुए। फरवरी में आयोजित सामुहिक सूर्यनमस्कार के कार्यक्रम में केवल छात्र-छात्राएँ नहीं अपितु सभी आयुवर्ग के लोग सम्मिलित हुए। सम्पूर्ण देश में 6697 स्थानों पर 26597 विद्यालयों का सहभाग रहा। जिसमें 64,17,401 छात्र और 7,25,400 अन्य जन ऐसे कुल 71,43,801 सहभागी हुए। यह अपने आप में एक उच्चांक है।
सार्धशती समारोह के निमित्त छत्तीसगढ़ प्रान्त में वनवासी अंचल में बोड़ला ग्राम में ‘‘विशाल हिन्दू संगम’’ का आयोजन किया गया। 10 फरवरी 2013 को ‘‘मौनी अमावस’’ (माघकृष्ण अमावस) को संपन्न इस विशाल हिन्दू संगम में प.पू.शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी, प.पू.सरसंघचालक जी तथा राज्य के माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामय उपस्थिति रही। इस विशाल समारोह में 1500 ग्रामों से 1 लाख 25 हजार हिन्दूओं का सहभाग रहा। हिन्दुत्व की प्रबल भावना का जागरण एवम् समस्त भेदों से ऊपर उठकर खड़ी हुई संगठित शक्ति यही इस क्षेत्र की नक्सलवाद, मतांतरण, सामाजिक विषमता ऐसी समस्याओं का हल है यही संदेश देने वाला यह संगम सभी दृष्टि से सफल रहा।
सार्ध शती समारोह के उपलक्ष्य में श्रीलंका में आयोजित हिन्दु संम्मेलन में 10,000 की सहभागिता और विभिन्न आयोजनों को मिलता प्रतिसाद निश्चित ही उत्साहवर्धक है। 
विश्वास है कि आनेवाले समय में आयोजित सभी कार्यक्रमों में समाज की सहभागिता इसी प्रकार की प्रभावी रहेगी। 150 वर्षों के बाद भी स्वामी विवेकांनद के प्रेरक विचारों की प्रासंगिकता समझकर वर्तमान में उसी दृढ़ता के साथ समाज अपने चिंतन की सशक्त नींवपर खड़ा रहे यही संकेत इन कार्यक्रमों की सफलता से मिलता हैं।
(8) प्रयाग में संपन्न कुंभ ः-
पवित्र महाकुंभ के अवसर पर प्रयाग में त्रिवेणीसंगम के तटपर विशाल हिन्दू समागम संम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में देश के कोने-कोने से विभिन्न संप्रदायों के साधु-संत-संन्यासी, धर्माचार्य, महामंडलेश्वर सहित पू. शंकराचार्य आदि महानुभावों की गरिमामय उपस्थिति थी। पू. सरसंघचालक जी ने भी इस कार्यक्रम को संबोधित किया। इस बैठक मे हिन्दू समाज के सम्मुख विद्यमान चुनौतियों पर गंभीर विचार मंथन हुआ। विशेष रूप से रामजन्मभूमि पर विशाल मंदिर के निर्माण का संकल्प दोहराया गया।
 30 सितम्बर 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा दिये गये निर्णय से यह स्पष्ट हो गया की जहाँ आज श्री रामलला विराजमान हैं, वही स्थान श्रीराम जन्म भूमि हैं। मुस्लिम समाज द्वारा दिये गये पूर्व वचनानुसार वह स्थान अब हिन्दू समाज को सौंप देना चाहिए और भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। लेकिन हिन्दू समाज अनुभव कर रहा है कि अभी बाधाएँ दूर नहीं हुई् हैं। मार्गदर्शक मंडल ने प्रस्ताव पारित कर महाजागरण एवम् महाअनुष्ठान का आवाहन किया है। हिन्दू समाज इस अनुष्ठान को सम्पूर्ण शक्ति के साथ सफल करें यह पूज्य संतों की हम सबसे अपेक्षा है। पूज्य संतोका विश्वास है कि ऐसी जागृत शक्ति ही मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
 हम इस वर्ष स्वामी विवेकानंद सार्धशताब्दी समारोह मना रहे है। उनके विचार हमें प्रेरणा, उर्जा, बल प्रदान करते है अतः उनके द्वारा प्रस्तुत चिंतन का हम नित्य मनन करे।
 स्वामीजी कहते है कि ‘‘जब कभी हमें असफलता मिलती है तब हम उसका आलोचनात्मक विश्लेषण करे तो निन्यानवे प्रतिशत बातों से हम एकही निष्कर्ष पर पहुँचेंगे की साधनों की ओर हमारा ध्यान न देना यही उसका कारण है। आवश्यकता है कि हम साधनों की पुष्टता, शुद्धता एवम् पूर्णता की ओर ध्यान दे। हमें विश्वास रखना चाहिये कि साधन पूर्णतः सही है तो साध्य प्राप्त होकर ही रहेंगा।’’
 हमारा साधन हमारी शाखा और उसके द्वारा निर्मित स्वयंसेवक है। यह साधन जितना परिपूर्ण होगा उतना ही हमारा परमवैभव संपन्न राष्ट्र का स्वप्न साकार होकर रहेगा।