श्री कृ. सूर्यनारायणराव जी को विनम्र श्रद्धांजलि - डॉ. मोहन भागवत जी

Suryanarayana Raoji

 

श्री कृ. सूर्यनारायणराव जी के देहावसान का आघात हम सब संघ कार्यकर्ताओं के लिये वरिष्ठ अनुभवी पितृसमान कार्यकर्ता की छत्रछाया उठ जाने का अतीव दःुखद अनुभव है। कुछ दिन पहले ही स्व. सूर्यनारायणराव जी के परिवार में उनके सबसे कनिष्ठ बंधु श्री गोपीनाथ का निधन हुआ। उसके तुरंत बाद यह दूसरा आघात भी परिवार सहित हम सबको व्याकुल करता है, फिर भी प्रकृति के नियमों के सामने हतबल होकर पचाना पडेगा।

कर्नाटक में संघकार्य के प्रारंभिक दिनों से श्री सूर्यनारायणराव जुडे रहे। प्रथम प्रतिबंध के प्रतिकार का पर्व सहभागी होकर उन्होंने देखा था। बाद में तमिलनाडु उनका कार्यक्षेत्र बना। तमिलनाडु के कार्य के आज के स्वरुप की सृजना में वे एक प्रमुख सर्जक थे। वैसे ही संघ कार्य के सेवा विभाग की प्रारंभिक और मूल रचना अखिल भारतीय सेवा प्रमुख के नाते उन्हीं के हाथों हुई। स्वामी विवेकानंद के साहित्य का उनका गहन और विस्तृत अध्ययन था।

आत्मीय स्वभाव, कठोर परिश्रम तथा संघशरणता का दर्षन उनके आचरण में सहज ही झलकता था। उनके जाने से हम आज के संघ कार्यकर्ताओं ने एक और अभिभावक खो दिया है।

माननीय श्री के. नरहरी तथा श्रीमति रुक्मिणीअक्का व परिवार का सांत्वन हम कैसे करे? हम सबकी स्थिति एक जैसी है। संघ कार्यकर्ता के, संघ प्रचारक के जीवन की जिस परंपरा को श्री सूर्यनारायणराव ने अपने जीवन समिधा से समृद्ध व अग्रेसर किया उसको अपने योगदान से अधिक समृद्ध करने का कर्तव्य हम सबके सामने उपस्थित है। उसको पुरा करने की शक्ति व धैर्य परमात्मा हम सबको दे तथा स्वयं की अखंड तपस्या से अर्जित उत्तम गति के मार्ग पर श्री सूर्यनारायणराव जी की दिवंगत जीवात्मा को शांति व आश्वस्ति प्राप्त हो यह प्रार्थना करता हुआ, मैं उनकी आत्मीय, पवित्र व प्रेरक स्मृति में मेरी व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पण करता हूँ।

मोहन भागवत
सरसंघचालक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

कार्तिक कृ. 6, युगाब्द 5118

दिनांक:- 19-11-2016