गुरु गोविंद सिंह जी की 350वें प्रकाशवर्ष के अवसर पर कार्यक्रम
दिनांक: 10-Mar-2017

 

 

Guru Govind Singh ji's 350th Prakash varsh Program

 

सर्वंशदानी गुरु गोविंद सिंह जी के 350वें प्रकाशवर्ष के अवसर 6 मार्च, रविवार को सूरत में आयोजित समागम कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि अपना देश संतों का देश रहा है, इस देश में कई महापुरुषों का सान्निध्य हमें प्राप्त होता रहा है. मैं सोच रहा था कि हम 350वां प्रकाशवर्ष क्यों मना रहे हैं, क्या गुरु गोविंद सिंह जी की महिमा का वर्णन करने के लिए हम कर रहे हैं?............. नहीं, उनकी महिमा और उनके जीवन का वर्णन हम जैसे सामान्य लोग क्या करेंगे? सम्मान तो इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इससे हमें भी कुछ ऊर्जा मिलेगी, कुछ शक्ति मिलेगी, कुछ साहस जुटा पाएंगे और सब प्रकार की प्रतिकूल परिस्थिति में हम डटकर खड़े रहेंगे. इसलिए उनका स्मरण करना है. आज अगर देश को किसी बात की आवश्यकता होगी तो उस पुरुषार्थ की आवश्यकता है, उस साहस की आवश्यकता है, उस त्याग और समर्पण की आवश्यकता है, अपना सर्वस्व न्योछावर करने की आवश्यकता है. ये सारी प्रेरणा कहां से मिलेगी और मैं आज मानता हूँ कि दशम गुरू, गुरू गोविंद सिंह जी से श्रेष्ठ और कौन हो सकता है. कश्मीर में हिन्दुओं पर अत्याचार के समय गुरू तेग बहादुर धर्म की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए.

 

Guru Govind Singh ji's 350th Prakash varsh Program

सरकार्यवाह जी ने कहा कि गुरू गोविंद सिंह जी एक बहुमुखी प्रतिभा थे, एक श्रेष्ठ कवि थे, आयुर्वेद का अध्ययन किया था, खगोल शास्त्र के ज्ञाता थे. इसी प्रकार ब्रज, अवधि, फारसी, अरबी भाषा के जानकर थे और जब संघर्ष का अवसर आया, तब अपनी तलवार का, अपनी कृपाण का पानी विश्व को दिखा दिया. इसलिए जब भक्ति के मार्ग पर चलने की लोगों को प्रेरणा देना है तो संत बनना पड़ता है, जब धर्म की रक्षा करना है तो सैनिक बनना पड़ता है. ऐसे संत और सैनिक दोनों का समागम जिनके जीवन में दिखायी देता है, वो हैं गुरु गोविंद सिंह जी.

अपने यहां हिन्दू समाज में चार वर्णों की बात कही गई है, हमने समाज को चार भागों में बाँट दिया. दशम गुरू कहते हैं कि ‘जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति चार वर्णों के गुणों से संम्पन्न नहीं बनेगा, तब तक समाज नहीं रहेगा वो समाज टूट जाएगा’. आज सामाजिक समरसता का सबसे अच्छा उदाहरण हमें गुरूद्वारे में देखने को मिलता है, जहां समाज का श्रेष्ठ व्यक्ति भी श्रद्धापूर्वक सफाई कार्य करता हुआ, हमें देखने को मिलता है. भक्ति का रास्ता अपने अंदर की शक्ति को जगाने के लिए है, कायर समाज कभी सम्मान के साथ नहीं जी सकता. समाज जीता है तो शक्ति के बल पर ऐसे पुरुषार्थी समाज की रचना गुरु गोविंद सिंह जी ने की. अपने परिवार का बलिदान कर दिया, लेकिन इस्लाम नहीं स्वीकारा.

 

 

Guru Govind Singh  ji's 350th Prakash varsh Program

 खालसा पंथ में दो शब्द चलते हैं संगत और पंगत. संगत में व्यक्ति आता है, गुरुवाणी सुनकर भाव विभोर हो जाता है, भक्ति से अंत:करण भर जाता है और पंगत में बैठता है तो सब प्रकार के भेदों को भूलकर ,हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं, एक ही ईश्वर के अंश हैं, इस भाव के साथ सब एक साथ भोजन करते हैं. वहां कोई ऊंचनीच का भेद नहीं होता. क्या आज 350 वर्ष के बाद भी ये सारे संदेश प्रासंगिक नहीं है, क्या आज देश को उनके बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता नहीं है. आज उनके बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है. आज अन्याय, अत्याचारों को सहन करने वाला समाज नहीं चाहिये. आज भारत को अगर दुनिया के सामने खड़ा रहना है तो गुरु गोविंद सिंह जी के संदेशों का स्मरण करते हुए अंत:करण में उन भावनाओं को प्रखर करने की आवश्यकता है.

भय्या जी जोशी ने कहा कि देश को श्रेष्ठ सिद्धांतों पर चलाएं न कि व्यक्तियों के बल पर, व्यक्ति आता है चला जाता है. व्यक्ति के प्रति निष्ठा रखना जीवन का अधूरापन है क्योंकि व्यक्ति की अपनी एक सीमा है और इस संदर्भ में जब हम गुरू गोविंद सिंह जी के जीवन को देखते है तो पाते हैं कि उन्होंने हमें जीवन का मार्गदर्शन, त्याग समर्पण बलिदान का संदेश देने के  लिये, हम सब के सामने गुरु ग्रंथ साहब को रखकर गये. हम उस पर माथा टेकते हैं और यही कामना करते हैं कि उसमें जो लिखा हुआ है, वह हमारे मन मस्तिष्क में उतरे और मन मस्तिष्क में उतरा हुआ वह विचार आचरण के धरातल पर सारा समाज, सारा विश्व अनुभव करे. यही उनके जीवन का श्रेष्ठ संदेश है और इसलिए गुरू ग्रंथ साहब को गुरु स्थान पर विराजमान किया है. गुरुग्रंथ साहब हम सब के लिए वन्दनीय है.

इस अवसर गुजरात के मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणि ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का 350वां प्रकाश वर्ष सारा देश मना रहा है. गुरू गोविंद सिंह जी की वीरता, शौर्य, उनके परिवार का बलिदान भी इतिहास में अमर है. भाग्यशाली हैं क्योंकि गुरू गोविंद सिंह जी के पंच प्यारों में गुजरात के द्वारका से मोहकम चंद भी चुने गए थे. गुरू गोविंद सिंह जी मुग़ल सल्तनत का सामना करने के लिए समाज जो शक्ति दी थी, वह आज भी प्रेरणास्रोत है. गुरू गोविंद सिंह जी केवल सिख समाज के आदर्श नहीं, वरन संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए आदर्श हैं. गुजरात सरकार एक कार्यक्रम करने जा रही है, जिसमें सिख समुदाय के साथ लगभग 50 हजार लोग सहभागी होंगे. कार्यक्रम में गुरू गोविंद सिंह जी के जीवन की संपूर्ण कथा का मंचन किया जाएगा.

इस अवसर पर राष्ट्रीय सिख संगत उदघोष (गुजरात विशेषांक) का विमोचन गुजरात के मुख्यमंत्री विजयभाई रुपानी, सिख संगत के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश जयसवाल, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अवतार सिंह तथा गुजरात के पदाधिकारियों की उपस्थिति में किया गया. कार्यक्रम के प्रारंभ में प.पू. शाह गुरविंदर सिंह जी ने आशीर्वचन दिया.